केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 28 अक्टूबर को प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना को मंजूरी दी। पंचायतों की विकास योजना, डिजिटल कामकाज और वित्तीय जवाबदेही सुधारने वाली यह योजना 2026-27 से 2030-31 तक चलेगी।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, कुल ₹7,395.55 करोड़ में केंद्र का हिस्सा ₹4,869.48 करोड़ और राज्यों का ₹2,526.07 करोड़ होगा।
गाँवों में किस काम पर रहेगा जोर?
ई-ग्रामस्वराज पर गाँव की जरूरतों, सरकारी योजनाओं और उपलब्ध संसाधनों को जोड़कर विकास योजनाएँ तैयार करने में पंचायतों को मदद मिलेगी। ग्रामसभाओं में चर्चा से स्थानीय प्राथमिकताएँ तय करने पर जोर रहेगा।
सालाना 2.55 लाख विकास योजनाओं और इतने ही ऑनलाइन ऑडिट प्लान का लक्ष्य है। लगभग 32 लाख निर्वाचित प्रतिनिधियों, पंचायत कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों की क्षमता बढ़ाने का भी प्रावधान है।
कहाँ लागू होगी और आगे क्या होगा?
योजना सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक जाएगी। राज्य अपनी वार्षिक कार्ययोजनाएँ देंगे, जिनका केंद्रीय समिति मूल्यांकन करेगी। किसी खास गाँव में काम शुरू होने की तारीख इस घोषणा में नहीं दी गई है।
इसके तहत स्थायी सरकारी पद नहीं बनेंगे। जरूरत के अनुसार संविदा पर तकनीकी सहायता ली जा सकती है।
आधिकारिक स्रोत: पंचायती राज मंत्रालय की 28 अक्टूबर की विज्ञप्ति।
फोटो: Mendhalekha / CC BY-SA 4.0 (क्रॉप)।
